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mahabharat 5.192.12-13h: राजा और उनकी पत्नी को भगवान महेश्वर द्वारा दिए गए वरदान का स्मरण हो आया। तत्पश्चात राजा द्रुपद ने दशार्णराज के पास दूत भेजकर कहा कि मेरा पुत्र पुरुष है। कृपया इस पर मेरा विश्वास कीजिए॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  5.192.12-13h 
सभार्यस्तच्च सस्मार महेश्वरवचस्तदा।
तत: सम्प्रेषयामास दशार्णाधिपतेर्नृप:॥ १२॥
पुरुषोऽयं मम सुत: श्रद्धत्तां मे भवानिति।
 
 
अनुवाद
राजा और उनकी पत्नी को भगवान महेश्वर द्वारा दिए गए वरदान का स्मरण हो आया। तत्पश्चात राजा द्रुपद ने दशार्णराज के पास दूत भेजकर कहा कि मेरा पुत्र पुरुष है। कृपया इस पर मेरा विश्वास कीजिए॥12 1/2॥
 
The king and his wife remembered the boon given to them by Lord Maheshwar. Thereafter, King Drupada sent a messenger to Dasharnaraj and said that my son is a male. Please believe me on this.॥ 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)