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mahabharat 5.192.10: राजन! इस प्रकार पुरुषत्व प्राप्त करके पांचाल देश का राजकुमार शिखण्डी अत्यन्त प्रसन्नतापूर्वक नगर में आया और अपने पिता से मिला।   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.192.10 
तत: शिखण्डी पाञ्चाल्य: पुंस्त्वमासाद्य पार्थिव।
विवेश नगरं हृष्ट: पितरं च समासदत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजन! इस प्रकार पुरुषत्व प्राप्त करके पांचाल देश का राजकुमार शिखण्डी अत्यन्त प्रसन्नतापूर्वक नगर में आया और अपने पिता से मिला।
 
King! Having thus attained manhood, the prince of Panchala, Shikhandi, came to the city very joyfully and met his father.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)