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mahabharat 5.191.9: अपने मन में यह सोचकर कि अपने सम्बन्धी के साथ होने वाले इस महायुद्ध को कैसे टाला जाए, वह भगवान से प्रार्थना करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.191.9 
कथं सम्बन्धिना सार्धं न मे स्याद् विग्रहो महान्।
इति संचिन्त्य मनसा देवतामर्चयत् तदा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अपने मन में यह सोचकर कि अपने सम्बन्धी के साथ होने वाले इस महायुद्ध को कैसे टाला जाए, वह भगवान से प्रार्थना करने लगा।
 
Thinking in his mind how to avert this great war with his relative, he started praying to the God.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)