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mahabharat 5.191.8: भरतश्रेष्ठ! दशार्णराज के प्रति द्वेष की भावना के कारण राजा द्रुपद को अपनी रानी सहित बहुत दुःख उठाना पड़ा॥8॥   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.191.8 
आर्तिं च परमां राजा जगाम सह भार्यया।
दशार्णपतिना सार्धं विरोधे भरतर्षभ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! दशार्णराज के प्रति द्वेष की भावना के कारण राजा द्रुपद को अपनी रानी सहित बहुत दुःख उठाना पड़ा॥8॥
 
Bharatshrestha! King Drupada along with his queen suffered a lot due to the feeling of hostility towards Dasharnaraj. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)