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mahabharat 5.191.6: नरेन्द्र! यद्यपि राजा द्रुपद ने स्वयं मना कर दिया था, फिर भी राजा दशार्ण के साथ सम्बन्ध और प्रेम बनाए रखने की इच्छा से उन्होंने एकाग्र मन से परामर्श किया और निर्णय पर पहुँचे ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.191.6 
सम्बन्धकं चैव समर्थ्यं तस्मिन्
दाशार्णके वै नृपतौ नरेन्द्र।
स्वयं कृत्वा विप्रलम्भं यथाव-
न्मन्त्रैकाग्रो निश्चयं वै जगाम॥ ६॥
 
 
अनुवाद
नरेन्द्र! यद्यपि राजा द्रुपद ने स्वयं मना कर दिया था, फिर भी राजा दशार्ण के साथ सम्बन्ध और प्रेम बनाए रखने की इच्छा से उन्होंने एकाग्र मन से परामर्श किया और निर्णय पर पहुँचे ॥6॥
 
Narendra! Although King Drupada himself had refused, yet, desiring to maintain the relationship and love with King Dasharna, he consulted with a concentrated mind and reached a decision. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)