Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.191.29-30: गुह्यक! हे महान यक्ष! आपने मुझे मेरे दुःखों से मुक्त करने का प्रण लिया है। मैं आपकी कृपा से महापुरुष बनना चाहता हूँ। जब तक राजा हिरण्यवर्मा हमारे नगर पर आक्रमण नहीं कर रहे हैं, तब तक मुझ पर कृपा कीजिए। | mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रतिज्ञातो हि भवता दु:खप्रतिशमो मम।
भवेयं पुरुषो यक्ष त्वत्प्रसादादनिन्दित:॥ २९॥
यावदेव स राजा वै नोपयाति पुरं मम।
तावदेव महायक्ष प्रसादं कुरु गुह्यक॥ ३०॥
अनुवाद
गुह्यक! हे महान यक्ष! आपने मुझे मेरे दुःखों से मुक्त करने का प्रण लिया है। मैं आपकी कृपा से महापुरुष बनना चाहता हूँ। जब तक राजा हिरण्यवर्मा हमारे नगर पर आक्रमण नहीं कर रहे हैं, तब तक मुझ पर कृपा कीजिए।
Guhyak! O great Yaksha! You have vowed to relieve me of my sorrows. I want to become a great man by your grace. Be kind to me as long as King Hiranyavarma is not attacking our city.
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि अम्बोपाख्यानपर्वणि स्थूणाकर्णसमागमे एकनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत अम्बोपाख्यानपर्वमें स्थूणाकर्णके साथ शिखण्डिनीका भेंटविषयक एक सौ इक्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥