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mahabharat 5.191.27: शिखादिनी बोली, 'हे यक्ष! मेरे पुत्रहीन पिता शीघ्र ही मर जायेंगे, क्योंकि दशार्णों का राजा कुपित होकर उन पर आक्रमण करेगा।   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.191.27 
शिखण्डिन्युवाच
अपुत्रो मे पिता यक्ष न चिरान्नाशमेष्यति।
अभियास्यति सक्रोधो दशार्णाधिपतिर्हि तम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
शिखादिनी बोली, 'हे यक्ष! मेरे पुत्रहीन पिता शीघ्र ही मर जायेंगे, क्योंकि दशार्णों का राजा कुपित होकर उन पर आक्रमण करेगा।
 
Shikhadini said, 'O Yaksha! My sonless father will soon perish because the king of Dasarnas will become enraged and attack him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)