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mahabharat 5.191.25: राजकुमारी! मैं कुबेर का सेवक हूँ। मुझमें वरदान देने की शक्ति है, तुम जो चाहो, वह मुझसे कहो। मैं तुम्हें अवांछनीय वस्तु भी दे दूँगा।'॥25॥   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.191.25 
धनेश्वरस्यानुचरो वरदोऽस्मि नृपात्मजे।
अदेयमपि दास्यामि ब्रूहि यत् ते विवक्षितम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजकुमारी! मैं कुबेर का सेवक हूँ। मुझमें वरदान देने की शक्ति है, तुम जो चाहो, वह मुझसे कहो। मैं तुम्हें अवांछनीय वस्तु भी दे दूँगा।'॥25॥
 
‘Princess! I am Kubera's servant. I have the power to grant boons, tell me whatever you wish for. I will give you even the non-desirable thing.'॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)