Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.191.23: स्थूनाकर्ण यक्ष ने उसे इस अवस्था में देखा। उसे देखकर उसके हृदय में करुणा उत्पन्न हुई। तब उसने पूछा- 'भद्रे! तुम यह व्रत क्यों कर रही हो? शीघ्र ही अपना उद्देश्य बताओ। मैं उसे पूर्ण करूँगा।'॥ 23॥ | mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्थूनाकर्ण यक्ष ने उसे इस अवस्था में देखा। उसे देखकर उसके हृदय में करुणा उत्पन्न हुई। तब उसने पूछा- 'भद्रे! तुम यह व्रत क्यों कर रही हो? शीघ्र ही अपना उद्देश्य बताओ। मैं उसे पूर्ण करूँगा।'॥ 23॥
Sthunakarna Yaksha saw her in this state. Seeing her, a feeling of tenderness arose in his heart. Then he asked- 'Bhadra! Why are you observing this fast? Tell me your purpose quickly. I will fulfill it.'॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥