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mahabharat 5.191.22: उस भवन में प्रवेश करने के बाद द्रुपद की पुत्री शिखंडिनी कई दिनों तक उपवास करके अपना शरीर सुखाती रही।   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.191.22 
तत् प्रविश्य शिखण्डी सा द्रुपदस्यात्मजा नृप।
अनश्नाना बहुतिथं शरीरमुदशोषयत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उस भवन में प्रवेश करने के बाद द्रुपद की पुत्री शिखंडिनी कई दिनों तक उपवास करके अपना शरीर सुखाती रही।
 
After entering that building, Shikhandini, the daughter of Drupada, kept drying her body by fasting for many days.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)