Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.191.21: इसके अन्दर स्थूणाकर्ण का विशाल भवन था, जो चूने और मिट्टी से लिपा हुआ था। इसकी दीवारें और द्वार बहुत ऊँचे थे। इसमें खस्की जड़ के धुएँ की सुगंध फैली हुई थी। | mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्र च स्थूणभवनं सुधामृत्तिकलेपनम्।
लाजोल्लापिकधूमाढॺमुच्चप्राकारतोरणम्॥ २१॥
अनुवाद
इसके अन्दर स्थूणाकर्ण का विशाल भवन था, जो चूने और मिट्टी से लिपा हुआ था। इसकी दीवारें और द्वार बहुत ऊँचे थे। इसमें खस्की जड़ के धुएँ की सुगंध फैली हुई थी।
Inside it was the huge building of Sthunakarna, which was plastered with lime and mud. Its walls and gates were very high. The fragrance of the smoke of Khaski root was spread in it. 21.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥