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mahabharat 5.191.20: राजन! वह वन वैभवशाली यक्ष स्थूनाकर्ण द्वारा रक्षित था। उसके भय से सामान्य लोगों ने उस वन में आना बंद कर दिया था।   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.191.20 
यक्षेणर्द्धिमता राजन् स्थूणाकर्णेन पालितम्।
तद्भयादेव च जनो विसर्जयति तद् वनम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजन! वह वन वैभवशाली यक्ष स्थूनाकर्ण द्वारा रक्षित था। उसके भय से सामान्य लोगों ने उस वन में आना बंद कर दिया था।
 
King! That forest was protected by the prosperous Yaksha Sthunakarna. Due to fear of him, ordinary people had stopped coming to that forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)