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mahabharat 5.191.2: राजन! पुत्रहीन होने के कारण मैंने अपनी पुत्रवधुओं के भय से इस शिखण्डिनी कन्या के जन्म लेने पर भी इसे पुत्र कहा है॥2॥   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.191.2 
अपुत्रया मया राजन् सपत्नीनां भयादिदम्।
कन्या शिखण्डिनी जाता पुरुषो वै निवेदिता॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजन! पुत्रहीन होने के कारण मैंने अपनी पुत्रवधुओं के भय से इस शिखण्डिनी कन्या के जन्म लेने पर भी इसे पुत्र कहा है॥2॥
 
King! Being sonless, out of fear of my daughters-in-law, even after the birth of this girl Shikhandini, I called her a son. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)