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mahabharat 5.191.19: इस प्रकार अपना जीवन समाप्त करने का निर्णय लेकर, वह अत्यंत दुःखी होकर अपना घर छोड़कर एक निर्जन और घने जंगल में चली गई।   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.191.19 
एवं सा निश्चयं कृत्वा भृशं शोकपरायणा।
निर्जगाम गृहं त्यक्त्वा गहनं निर्जनं वनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपना जीवन समाप्त करने का निर्णय लेकर, वह अत्यंत दुःखी होकर अपना घर छोड़कर एक निर्जन और घने जंगल में चली गई।
 
Having thus decided to end her life, she left her home, deeply grieved, and went to a deserted and dense forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)