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mahabharat 5.191.17-18: उनको दुःखपूर्वक बातें करते देख उनकी तपस्वी पुत्री शिखण्डी लज्जित होकर इस प्रकार चिन्ता करने लगी - ‘मेरे कारण ही मेरे माता-पिता दुःखी हो रहे हैं।’ ऐसा सोचकर उसने प्राण त्यागने का विचार किया॥ 17-18॥   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  5.191.17-18 
एवं संभाषमाणौ तु दृष्ट्वा शोकपरायणौ।
शिखण्डिनी तदा कन्या व्रीडितेव तपस्विनी॥ १७॥
तत: सा चिन्तयामास मत्कृते दु:खितावुभौ।
इमाविति ततश्चक्रे मतिं प्राणविनाशने॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उनको दुःखपूर्वक बातें करते देख उनकी तपस्वी पुत्री शिखण्डी लज्जित होकर इस प्रकार चिन्ता करने लगी - ‘मेरे कारण ही मेरे माता-पिता दुःखी हो रहे हैं।’ ऐसा सोचकर उसने प्राण त्यागने का विचार किया॥ 17-18॥
 
Seeing them talking in grief, their ascetic daughter Shikhandi felt ashamed and began to worry like this - 'My mother and father are suffering because of me.' Thinking so, she thought of giving up her life.॥ 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)