Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.191.15: भूपाल! पुरुषार्थ के साथ संयुक्त होने पर ही विशेष रूप से दैवी सिद्धि प्राप्त होती है। जब दैवी और पुरुषार्थ में परस्पर विरोध होता है, तब दोनों में से कोई भी सिद्धि प्राप्त नहीं कर सकता। 15॥ | mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दैवं हि मानुषोपेतं भृशं सिद्धॺति पार्थिव।
परस्परविरोधाद्धि सिद्धिरस्ति न चैतयो:॥ १५॥
अनुवाद
भूपाल! पुरुषार्थ के साथ संयुक्त होने पर ही विशेष रूप से दैवी सिद्धि प्राप्त होती है। जब दैवी और पुरुषार्थ में परस्पर विरोध होता है, तब दोनों में से कोई भी सिद्धि प्राप्त नहीं कर सकता। 15॥
Bhupal! Only when combined with efforts, one attains divine success especially. When there is mutual opposition between the divine and the efforts, neither of them can achieve success. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥