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mahabharat 5.191.14: हे राजा विशाललोचन! इस नगर की रक्षा के लिए आपने अपने मंत्रियों से जो विचार-विमर्श किया है, वैसा ही कीजिए॥14॥   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.191.14 
मन्त्रिभिर्मन्त्रितं सार्धं त्वया पृथुललोचन।
पुरस्यास्याविनाशाय यच्च राजंस्तथा कुरु॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे राजा विशाललोचन! इस नगर की रक्षा के लिए आपने अपने मंत्रियों से जो विचार-विमर्श किया है, वैसा ही कीजिए॥14॥
 
King Vishallochan! Do as you have discussed with your ministers for the protection of this city.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)