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mahabharat 5.191.13: प्रभु! मन में विचार करो कि दशार्णराज बिना युद्ध किये ही लौट जाएँ। यह सब देवताओं की कृपा से ही होगा॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.191.13 
अयुद्धेन निवृत्तिं च मनसा चिन्तय प्रभो।
देवतानां प्रसादेन सर्वमेतद् भविष्यति॥ १३॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! मन में विचार करो कि दशार्णराज बिना युद्ध किये ही लौट जाएँ। यह सब देवताओं की कृपा से ही होगा॥13॥
 
‘Prabhu! Think in your mind that Dasharnaraj should return without fighting. All this will be accomplished by the grace of the Gods.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)