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mahabharat 5.191.10: राजन! राजा द्रुपद को देवताओं की पूजा में तत्पर देखकर रानी ने स्तुति करते हुए राजा से इस प्रकार कहा - 10॥   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.191.10 
तं तु दृष्ट्वा तदा राजन् देवी देवपरं तदा।
अर्चां प्रयुञ्जानमथो भार्या वचनमब्रवीत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजन! राजा द्रुपद को देवताओं की पूजा में तत्पर देखकर रानी ने स्तुति करते हुए राजा से इस प्रकार कहा - 10॥
 
Rajan! Seeing King Drupada ready to worship the gods, the queen, while offering prayers, said to the king thus - 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)