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mahabharat 5.191.1: भीष्मजी कहते हैं- महाबाहु नरेश्वर! तब शिखंडी की मां ने अपने पति को असली राज बताया और कहा- 'यह पुत्र शिखंडी नहीं, बल्कि शिखंडिनी नाम की लड़की है।' 1॥   |   mahabharat अध्याय 5.191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 191: द्रुपदपत्नीका उत्तर, द्रुपदके द्वारा नगररक्षाकी व्यवस्था और देवाराधन तथा शिखण्डिनीका वनमें जाकर स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे अपने दु:खनिवारणके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.191.1 
भीष्म उवाच
तत: शिखण्डिनो माता यथातत्त्वं नराधिप।
आचचक्षे महाबाहो भर्त्रे कन्यां शिखण्डिनीम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- महाबाहु नरेश्वर! तब शिखंडी की मां ने अपने पति को असली राज बताया और कहा- 'यह पुत्र शिखंडी नहीं, बल्कि शिखंडिनी नाम की लड़की है।' 1॥
 
Bhishmaji says- Mahabahu Nareshwar! Then Shikhandi's mother told the real secret to her husband and said - 'This son is not Shikhandi, but a girl named Shikhandini.' 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)