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mahabharat 5.190.19: सुश्रोणि! मैं पूछ रहा हूँ। मुझे कोई ऐसा उपाय बताइए जिससे सभी को संकट से मुक्ति मिले। शुचिस्मिते! मैं शीघ्र ही उस उपाय को लागू करूँगा।   |   mahabharat अध्याय 5.190: हिरण्यवर्माके आक्रमणके भयसे घबराये हुए द्रुपदका अपनी महारानीसे संकटनिवारणका उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.190.19 
सा त्वं सर्वविमोक्षाय तत्त्वमाख्याहि पृच्छत:।
तथा विदध्यां सुश्रोणि कृत्यमाशु शुचिस्मिते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सुश्रोणि! मैं पूछ रहा हूँ। मुझे कोई ऐसा उपाय बताइए जिससे सभी को संकट से मुक्ति मिले। शुचिस्मिते! मैं शीघ्र ही उस उपाय को लागू करूँगा।
 
Sushroni! I am asking. Tell me some real solution to save everyone from trouble. Shuchismite! I will implement that solution soon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)