Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.190.18: रानी! मेरे प्राण संकट में हैं। यह शिखण्डिनी भी कन्या है। हे सुन्दरी! तुम भी महान् संकट में फँसी हो।॥18॥   |   mahabharat अध्याय 5.190: हिरण्यवर्माके आक्रमणके भयसे घबराये हुए द्रुपदका अपनी महारानीसे संकटनिवारणका उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 190: हिरण्यवर्माके आक्रमणके भयसे घबराये हुए द्रुपदका अपनी महारानीसे संकटनिवारणका उपाय पूछना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.190.18 
अहं हि संशयं प्राप्तो बाला चेयं शिखण्डिनी।
त्वं च राज्ञि महत् कृच्छ्रं सम्प्राप्ता वरवर्णिनि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
रानी! मेरे प्राण संकट में हैं। यह शिखण्डिनी भी कन्या है। हे सुन्दरी! तुम भी महान् संकट में फँसी हो।॥18॥
 
‘Queen! My life is in doubt. This Shikhandini is also a girl. Beautiful lady! You too are trapped in a great problem.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)