श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 190: हिरण्यवर्माके आक्रमणके भयसे घबराये हुए द्रुपदका अपनी महारानीसे संकटनिवारणका उपाय पूछना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.190.15 
किमिदानीं करिष्यावो मूढौ कन्यामिमां प्रति।
शिखण्डी किल पुत्रस्ते कन्येति परिशङ्कित:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस समय हमें क्या करना चाहिए ? इस कन्या के विषय में हम कुछ नहीं समझ पा रहे हैं । इस सम्बन्धी के मन में यह संदेह उत्पन्न हो गया है कि आपका पुत्र शिखण्डी वास्तव में कन्या है ॥15॥
 
‘What should we do at this time? We are at a loss as to what to do regarding this girl. The doubt has taken root in the mind of the relative that your son Shikhandi is actually a girl.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)