श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 190: हिरण्यवर्माके आक्रमणके भयसे घबराये हुए द्रुपदका अपनी महारानीसे संकटनिवारणका उपाय पूछना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.190.12 
विसृज्य दूतान् दाशार्णे द्रुपद: शोकमूर्छित:।
समेत्य भार्यां रहिते वाक्यमाह नराधिप:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजा द्रुपद ने दुःख से अधीर होकर दशार्णराज के पास दूत भेजकर एकांत स्थान में अपनी पत्नी से मिलकर उससे इस विषय में चर्चा करने की इच्छा की॥12॥
 
Having sent messengers to the King of Dasharna, King Drupada, being impatient with grief, desired to meet his wife in a secluded place and discuss the matter with her.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)