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mahabharat 5.190.11: भीष्म कहते हैं - उन दिनों राजा द्रुपद स्वभाव से ही डरपोक थे। साथ ही उन्होंने एक अपराध भी किया था। इसलिए उन्हें बड़ा भय हो रहा था ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 5.190: हिरण्यवर्माके आक्रमणके भयसे घबराये हुए द्रुपदका अपनी महारानीसे संकटनिवारणका उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 190: हिरण्यवर्माके आक्रमणके भयसे घबराये हुए द्रुपदका अपनी महारानीसे संकटनिवारणका उपाय पूछना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.190.11 
भीष्म उवाच
स हि प्रकृत्या वै भीत: किल्बिषी च नराधिप:।
भयं तीव्रमनुप्राप्तो द्रुपद: पृथिवीपति:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - उन दिनों राजा द्रुपद स्वभाव से ही डरपोक थे। साथ ही उन्होंने एक अपराध भी किया था। इसलिए उन्हें बड़ा भय हो रहा था ॥11॥
 
Bhishma says - King Drupada was timid by nature in those days. Moreover, he had committed a crime. Therefore, he experienced great fear. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)