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mahabharat 5.19.3-4: कुल्हाड़ी, भाले, त्रिशूल, गदा, गदा, बर्छी, पाश, स्वच्छ तलवारें, कटार, धनुष और नाना प्रकार के बाण आदि तेल में धुले होने के कारण चमक रहे थे, जो सेना की शोभा बढ़ा रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 5.19: युधिष्ठिर और दुर्योधनके यहाँ सहायताके लिये आयी हुई सेनाओंका संक्षिप्त विवरण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 19: युधिष्ठिर और दुर्योधनके यहाँ सहायताके लिये आयी हुई सेनाओंका संक्षिप्त विवरण  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  5.19.3-4 
परश्वधैर्भिन्दिपालै: शूलतोमरमुद्‍गरै:।
परिघैर्यष्टिभि: पाशै: करवालैश्च निर्मलै:॥ ३॥
खड्गकार्मुकनिर्व्यूहै: शरैश्च विविधैरपि।
तैलधौतै: प्रकाशद्भिस्तदशोभत वै बलम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कुल्हाड़ी, भाले, त्रिशूल, गदा, गदा, बर्छी, पाश, स्वच्छ तलवारें, कटार, धनुष और नाना प्रकार के बाण आदि तेल में धुले होने के कारण चमक रहे थे, जो सेना की शोभा बढ़ा रहे थे।
 
The axes, spears, tridents, maces, clubs, spears, nooses, clean swords, daggers*, bows and various kinds of arrows etc., were shining due to being washed in oil, which was beautifying the army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)