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mahabharat 5.19.29-31: अतः भारत! पंचनद क्षेत्र, सम्पूर्ण कुरुजांगल देश, रोहितकवन (रोहतक), सम्पूर्ण मरुस्थल, अहिच्छत्र, कालकूट, गंगा का तट, वारण, वटधन और यमुना पर्वत - प्रचुर धन-धान्य से परिपूर्ण यह विशाल क्षेत्र कौरवों की सेना से पूर्णतः घिरा हुआ था। 29-31॥   |   mahabharat अध्याय 5.19: युधिष्ठिर और दुर्योधनके यहाँ सहायताके लिये आयी हुई सेनाओंका संक्षिप्त विवरण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 19: युधिष्ठिर और दुर्योधनके यहाँ सहायताके लिये आयी हुई सेनाओंका संक्षिप्त विवरण  »  श्लोक 29-31
 
 
श्लोक  5.19.29-31 
तत: पञ्चनदं चैव कृत्स्नं च कुरुजाङ्गलम्॥ २९॥
तथा रोहितकारण्यं मरुभूमिश्च केवला।
अहिच्छत्रं कालकूटं गङ्गाकूलं च भारत॥ ३०॥
वारणं वाटधानं च यामुनश्चैव पर्वत:।
एष देश: सुविस्तीर्ण: प्रभूतधनधान्यवान्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
अतः भारत! पंचनद क्षेत्र, सम्पूर्ण कुरुजांगल देश, रोहितकवन (रोहतक), सम्पूर्ण मरुस्थल, अहिच्छत्र, कालकूट, गंगा का तट, वारण, वटधन और यमुना पर्वत - प्रचुर धन-धान्य से परिपूर्ण यह विशाल क्षेत्र कौरवों की सेना से पूर्णतः घिरा हुआ था। 29-31॥
 
Therefore India! Panchnad region, the entire Kurujangal country, Rohitkavan (Rohtak), the entire desert, Ahichchhatra, Kalakoot, the banks of Ganga, Varan, Vatdhan and Yamun mountain - this vast region full of abundant wealth and grains was completely surrounded by the army of Kauravas. 29-31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)