Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.189.22-23: नरेश्वर! तुमने मेरा जो अपमान किया है, वह निश्चय ही तुम्हारे कुविचार का प्रतीक है। तुमने प्रेमवश मेरी पुत्री को अपनी पुत्री के रूप में चुना था। दुष्ट! उस छल-कपट का फल तुम्हें शीघ्र ही मिलेगा, धैर्य रखो। मैं अब तुम्हें तुम्हारे सेवकों और मंत्रियों सहित उखाड़ फेंकूँगा।'॥ 22-23॥ | mahabharat अध्याय 5.189: शिखण्डीका विवाह तथा उसके स्त्री होनेका समाचार पाकर उसके श्वशुर दशार्णराजका महान् कोप । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरेश्वर! तुमने मेरा जो अपमान किया है, वह निश्चय ही तुम्हारे कुविचार का प्रतीक है। तुमने प्रेमवश मेरी पुत्री को अपनी पुत्री के रूप में चुना था। दुष्ट! उस छल-कपट का फल तुम्हें शीघ्र ही मिलेगा, धैर्य रखो। मैं अब तुम्हें तुम्हारे सेवकों और मंत्रियों सहित उखाड़ फेंकूँगा।'॥ 22-23॥
‘Nareshwar! The insult you have done to me is definitely a sign of your wrong thinking. You had chosen my daughter for your daughter out of love. Evil one! You will soon get the result of that deception and fraud, be patient. I will now uproot you along with your servants and ministers.'॥ 22-23॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि अम्बोपाख्यानपर्वणि हिरण्यवर्मदूतागमने एकोननवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत अम्बोपाख्यानपर्वमें हिरण्यवर्माके दूतका आगमनविषयक एक सौ नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥