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mahabharat 5.189.2-3: महाराज! शिखण्डी धनुर्विद्या के लिए द्रोणाचार्य का शिष्य बना। महाराज! शिखण्डी की सुन्दरी माता ने राजा द्रुपद को अपने पुत्र के लिए कन्या लाने की प्रेरणा की। वह अपनी पुत्री का विवाह पुत्र के समान करना चाहती थी। द्रुपद ने देखा कि उनकी पुत्री बड़ी हो जाने पर भी अभी तक स्त्री ही है (वरदान के अनुसार पुरुष नहीं बन सकती), इससे उनकी पत्नी सहित उनके मन में बड़ी चिन्ता हुई॥ 2-3॥   |   mahabharat अध्याय 5.189: शिखण्डीका विवाह तथा उसके स्त्री होनेका समाचार पाकर उसके श्वशुर दशार्णराजका महान् कोप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 189: शिखण्डीका विवाह तथा उसके स्त्री होनेका समाचार पाकर उसके श्वशुर दशार्णराजका महान् कोप  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  5.189.2-3 
इष्वस्त्रे चैव राजेन्द्र द्रोणशिष्यो बभूव ह।
तस्य माता महाराज राजानं वरवर्णिनी॥ २॥
चोदयामास भार्यार्थं कन्याया: पुत्रवत् तदा।
ततस्तां पार्षतो दृष्ट्वा कन्यां सम्प्राप्तयौवनाम्।
स्त्रियं मत्वा ततश्चिन्तां प्रपेदे सह भार्यया॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! शिखण्डी धनुर्विद्या के लिए द्रोणाचार्य का शिष्य बना। महाराज! शिखण्डी की सुन्दरी माता ने राजा द्रुपद को अपने पुत्र के लिए कन्या लाने की प्रेरणा की। वह अपनी पुत्री का विवाह पुत्र के समान करना चाहती थी। द्रुपद ने देखा कि उनकी पुत्री बड़ी हो जाने पर भी अभी तक स्त्री ही है (वरदान के अनुसार पुरुष नहीं बन सकती), इससे उनकी पत्नी सहित उनके मन में बड़ी चिन्ता हुई॥ 2-3॥
 
King! Shikhandi became the disciple of Dronacharya for archery. Maharaj! Shikhandi's beautiful mother inspired King Drupada to get a bride for her son. She wanted to marry her daughter like a son. Drupada saw that even though his daughter has grown up, she is still a woman (could not become a man as per the boon), this caused a lot of worry in his mind along with his wife.॥ 2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)