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mahabharat 5.189.17: महाराज! शिखण्डी भी उस राजकुल में पुरुष की भाँति सुखपूर्वक विचरण करता था। उसे अपना स्त्रीत्व अच्छा नहीं लगता था॥17॥   |   mahabharat अध्याय 5.189: शिखण्डीका विवाह तथा उसके स्त्री होनेका समाचार पाकर उसके श्वशुर दशार्णराजका महान् कोप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 189: शिखण्डीका विवाह तथा उसके स्त्री होनेका समाचार पाकर उसके श्वशुर दशार्णराजका महान् कोप  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.189.17 
शिखण्डॺपि महाराज पुंवद् राजकुले तदा।
विजहार मुदा युक्त: स्त्रीत्वं नैवातिरोचयन्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! शिखण्डी भी उस राजकुल में पुरुष की भाँति सुखपूर्वक विचरण करता था। उसे अपना स्त्रीत्व अच्छा नहीं लगता था॥17॥
 
Maharaj! Shikhandi also used to roam around happily like a man in that royal family. He did not like his womanhood.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)