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mahabharat 5.189.12-13: श्रेष्ठ! हिरण्यवर्मा की पुत्री भी यौवन को प्राप्त हो चुकी थी। इधर द्रुपद की पुत्री शिखण्डिनी भी पूर्ण कन्या हो चुकी थी। विवाहोत्सव समाप्त होने पर शिखण्डी अपनी पत्नी सहित पुनः काम्पिल्य नगरी में आया। कुछ ही दिनों में दशार्णराज की पुत्री समझ गई कि शिखण्डी एक स्त्री है ॥12-13॥   |   mahabharat अध्याय 5.189: शिखण्डीका विवाह तथा उसके स्त्री होनेका समाचार पाकर उसके श्वशुर दशार्णराजका महान् कोप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.189.12-13 
कृते विवाहे तु तदा सा कन्या राजसत्तम।
यौवनं समनुप्राप्ता सा च कन्या शिखण्डिनी॥ १२॥
कृतदार: शिखण्डी च काम्पिल्यं पुनरागमत्।
तत: सा वेद तां कन्यां कञ्चित् कालं स्त्रियं किल॥ १३॥
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ! हिरण्यवर्मा की पुत्री भी यौवन को प्राप्त हो चुकी थी। इधर द्रुपद की पुत्री शिखण्डिनी भी पूर्ण कन्या हो चुकी थी। विवाहोत्सव समाप्त होने पर शिखण्डी अपनी पत्नी सहित पुनः काम्पिल्य नगरी में आया। कुछ ही दिनों में दशार्णराज की पुत्री समझ गई कि शिखण्डी एक स्त्री है ॥12-13॥
 
The best! Hiranyavarma's daughter had also attained puberty. Here Drupada's daughter Shikhandini had also become a full-fledged girl. After the marriage ceremony was over, Shikhandi along with his wife again came to Kampilya city. Within a few days, Dasharnaraj's daughter understood that Shikhandi was a woman. 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)