श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 188: अम्बाका राजा द्रुपदके यहाँ कन्याके रूपमें जन्म, राजा तथा रानीका उसे पुत्ररूपमें प्रसिद्ध करके उसका नाम शिखण्डी रखना  »  श्लोक 4-6h
 
 
श्लोक  5.188.4-6h 
अस्मद्वधार्थं निश्चित्य तपो घोरं समास्थित:।
ऋते कन्यां महादेव पुत्रो मे स्यादिति ब्रुवन्॥ ४॥
भगवन् पुत्रमिच्छामि भीष्मं प्रतिचिकीर्षया।
इत्युक्तो देवदेवेन स्त्रीपुमांस्ते भविष्यति॥ ५॥
निवर्तस्व महीपाल नैतज्जात्वन्यथा भवेत्।
 
 
अनुवाद
हम लोगों के वध हेतु पुत्र प्राप्ति का दृढ़ निश्चय करके उसने घोर तपस्या की और कहा, 'महादेव! मुझे पुत्री नहीं, पुत्र चाहिए। हे प्रभु! मुझे भीष्म से बदला लेने के लिए पुत्र चाहिए।' यह सुनकर देवाधिदेव महादेवजी ने कहा - 'भूपाल! पहले तुम पुत्री प्राप्त करोगे, फिर वह पुरुष बन जाएगी। अब तुम लौट जाओ। मेरी कही हुई बात कभी मिथ्या नहीं हो सकती।'॥4-5 1/2॥
 
With a firm resolve to get a son to kill us, he performed severe penance saying, 'Mahadev! I don't want a daughter, I want a son. Lord! I want a son to take revenge from Bhishma'. On hearing this, the lord of gods Mahadevji said - 'Bhoopal! First you will get the daughter, then she will become a man. Now you return. What I have said can never be false'॥ 4-5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)