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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 188: अम्बाका राजा द्रुपदके यहाँ कन्याके रूपमें जन्म, राजा तथा रानीका उसे पुत्ररूपमें प्रसिद्ध करके उसका नाम शिखण्डी रखना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.188.18 
श्रद्दधानो हि तद्वाक्यं देवस्याच्युततेजस:।
छादयामास तां कन्यां पुमानिति च सोऽब्रवीत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जिनकी महिमा कभी क्षीण नहीं होती, ऐसे महादेवजी के वचनों पर विश्वास रखने के कारण राजा द्रुपद ने अपना कौमार्य छिपाकर उन्हें पुत्रवत घोषित कर दिया।
 
Due to having faith in the words of Mahadevji whose glory never fades, King Drupada hid his virginity and declared him to be a son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)