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mahabharat 5.187.7: तब शूलपाणि उमावल्लभ भगवान शिव उन महर्षियों के बीच अपने साकार रूप में प्रकट हुए और उस तपस्वी को दर्शन दिए॥7॥   |   mahabharat अध्याय 5.187: अम्बाका द्वितीय जन्ममें पुन: तप करना और महादेवजीसे अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उसका चिताकी आगमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 187: अम्बाका द्वितीय जन्ममें पुन: तप करना और महादेवजीसे अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उसका चिताकी आगमें प्रवेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.187.7 
तां देवो दर्शयामास शूलपाणिरुमापति:।
मध्ये तेषां महर्षीणां स्वेन रूपेण तापसीम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तब शूलपाणि उमावल्लभ भगवान शिव उन महर्षियों के बीच अपने साकार रूप में प्रकट हुए और उस तपस्वी को दर्शन दिए॥7॥
 
Then Shulpani Umavallabh Lord Shiva appeared in His physical form among those Maharishis and gave darshan to that ascetic. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)