Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.187.4-5: जिसके कारण मैं सदा के लिए इस दुःखमय स्थिति में पड़ गई हूँ और पतिलोक से वंचित होकर इस संसार में न तो स्त्री हूँ और न ही पुरुष। उस गंगापुत्र भीष्म को युद्ध में मारे बिना मैं तपस्या से निवृत्त नहीं होऊँगी। हे तपस्वियों! यह मेरे हृदय का संकल्प है, जो मैंने स्पष्ट रूप से कह दिया है।॥ 4-5॥ | mahabharat अध्याय 5.187: अम्बाका द्वितीय जन्ममें पुन: तप करना और महादेवजीसे अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उसका चिताकी आगमें प्रवेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यत्कृते दु:खवसतिमिमां प्राप्तास्मि शाश्वतीम्।
पतिलोकाद् विहीना च नैव स्त्री न पुमानिह॥ ४॥
नाहत्वा युधि गाङ्गेयं निवर्तिष्ये तपोधना:।
एष मे हृदि संकल्पो यदिदं कथितं मया॥ ५॥
अनुवाद
जिसके कारण मैं सदा के लिए इस दुःखमय स्थिति में पड़ गई हूँ और पतिलोक से वंचित होकर इस संसार में न तो स्त्री हूँ और न ही पुरुष। उस गंगापुत्र भीष्म को युद्ध में मारे बिना मैं तपस्या से निवृत्त नहीं होऊँगी। हे तपस्वियों! यह मेरे हृदय का संकल्प है, जो मैंने स्पष्ट रूप से कह दिया है।॥ 4-5॥
‘Due to which I have fallen into this sorrowful situation forever and being deprived of my husband's world, I am neither a woman nor a man in this world. I will not retire from penance without killing that son of Ganga, Bhishma in battle. O ascetics! This is the resolution of my heart, which I have clearly stated.॥ 4-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥