Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.187.2: तब उस कन्या ने तपस्वी ऋषियों से कहा - 'भीष्म ने मेरा तिरस्कार किया है और मुझे पति प्राप्ति तथा उनकी सेवा के कर्तव्य से वंचित कर दिया है।॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 5.187: अम्बाका द्वितीय जन्ममें पुन: तप करना और महादेवजीसे अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उसका चिताकी आगमें प्रवेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तानुवाच तत: कन्या तपोवृद्धानृषींस्तदा।
निराकृतास्मि भीष्मेण भ्रंशिता पतिधर्मत:॥ २॥
अनुवाद
तब उस कन्या ने तपस्वी ऋषियों से कहा - 'भीष्म ने मेरा तिरस्कार किया है और मुझे पति प्राप्ति तथा उनकी सेवा के कर्तव्य से वंचित कर दिया है।॥ 2॥
Then the girl said to the sages who had attained penance, 'Bhishma has spurned me and has deprived me of getting a husband and the duty of serving him.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥