श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 187: अम्बाका द्वितीय जन्ममें पुन: तप करना और महादेवजीसे अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उसका चिताकी आगमें प्रवेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.187.16 
एवमुक्त्वा महादेव: कपर्दी वृषभध्वज:।
पश्यतामेव विप्राणां तत्रैवान्तरधीयत॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर जटाधारी और वृषभध्वज महादेव जी उन सब ब्राह्मणों के सामने ही अन्तर्धान हो गए।16.
 
Saying this, Mahadev Ji with matted hair and Vrishabhdhavaja disappeared right there in front of all those Brahmins. 16.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)