vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 187: अम्बाका द्वितीय जन्ममें पुन: तप करना और महादेवजीसे अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उसका चिताकी आगमें प्रवेश
»
श्लोक 12
श्लोक
5.187.12
तामुवाच महादेव: कन्यां किल वृषध्वज:।
न मे वागनृतं प्राह सत्यं भद्रे भविष्यति॥ १२॥
अनुवाद
तब वृषभध्वज महादेवजी ने उस कन्या से कहा- 'हे भद्रे! मेरे वचन कभी झूठ नहीं बोले, अतः मेरे वचन सदैव सत्य ही रहेंगे॥ 12॥
Then Vrishabhadhwaj Mahadevji said to the girl- 'Good lady! My words have never uttered a lie; hence my words will always be true.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×