श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 187: अम्बाका द्वितीय जन्ममें पुन: तप करना और महादेवजीसे अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उसका चिताकी आगमें प्रवेश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.187.12 
तामुवाच महादेव: कन्यां किल वृषध्वज:।
न मे वागनृतं प्राह सत्यं भद्रे भविष्यति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तब वृषभध्वज महादेवजी ने उस कन्या से कहा- 'हे भद्रे! मेरे वचन कभी झूठ नहीं बोले, अतः मेरे वचन सदैव सत्य ही रहेंगे॥ 12॥
 
Then Vrishabhadhwaj Mahadevji said to the girl- 'Good lady! My words have never uttered a lie; hence my words will always be true.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)