Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.187.11: वृषध्वज! आप अपने इस वरदान को सत्य करने के लिए जो भी करना पड़े, कीजिए, जिससे मैं युद्ध में शान्तनुपुत्र भीष्म का सामना करके उनका वध कर सकूँ।॥11॥   |   mahabharat अध्याय 5.187: अम्बाका द्वितीय जन्ममें पुन: तप करना और महादेवजीसे अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उसका चिताकी आगमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 187: अम्बाका द्वितीय जन्ममें पुन: तप करना और महादेवजीसे अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उसका चिताकी आगमें प्रवेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.187.11 
यथा स सत्यो भवति तथा कुरु वृषध्वज।
यथा हन्यां समागम्य भीष्मं शान्तनवं युधि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वृषध्वज! आप अपने इस वरदान को सत्य करने के लिए जो भी करना पड़े, कीजिए, जिससे मैं युद्ध में शान्तनुपुत्र भीष्म का सामना करके उनका वध कर सकूँ।॥11॥
 
Vrishadhwaj! Please do whatever it takes to make this boon of yours come true so that I can face Shantanu's son Bhishma in the war and kill him.'॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)