श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 187: अम्बाका द्वितीय जन्ममें पुन: तप करना और महादेवजीसे अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उसका चिताकी आगमें प्रवेश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.187.10 
स्त्रीभावेन च मे गाढं मन: शान्तमुमापते।
प्रतिश्रुतश्च भूतेश त्वया भीष्मपराजय:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उमापति! भूतनाथ! स्त्री रूप में होने के कारण मेरी बुद्धि बड़ी मंद है। और यहाँ आपने मुझे वरदान दिया है कि भीष्म मुझसे पराजित होंगे॥10॥
 
Umapati! Bhootnath! Due to being in the form of a woman my mind is very dull. And here you have given me the boon that Bhishma will be defeated by me.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)