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mahabharat 5.187.1: भीष्म कहते हैं - पितामह ! उस जन्म में भी उन्हें तपस्या करने के लिए दृढ़ देखकर समस्त तपस्वी मुनियों ने उन्हें रोककर पूछा - 'तुम क्या करना चाहते हो?'॥1॥   |   mahabharat अध्याय 5.187: अम्बाका द्वितीय जन्ममें पुन: तप करना और महादेवजीसे अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उसका चिताकी आगमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.187.1 
भीष्म उवाच
ततस्ते तापसा: सर्वे तपसे धृतनिश्चयाम्।
दृष्ट्वा न्यवर्तयंस्तात किं कार्यमिति चाब्रुवन्॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - पितामह ! उस जन्म में भी उन्हें तपस्या करने के लिए दृढ़ देखकर समस्त तपस्वी मुनियों ने उन्हें रोककर पूछा - 'तुम क्या करना चाहते हो?'॥1॥
 
Bhishma says - Father! Seeing him determined to perform tapasya in that birth too, all the ascetic saints stopped him and asked - 'What do you want to do?'॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)