श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 186: अम्बाकी कठोर तपस्या  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.186.4 
भीष्ममेव प्रपद्यस्व न तेऽन्या विद्यते गति:।
निर्जितो ह्यस्मि भीष्मेण महास्त्राणि प्रमुञ्चता॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अब तुम भीष्म की शरण में जाओ। तुम्हारे लिए और कोई उपाय नहीं है, क्योंकि भीष्म ने बड़े-बड़े अस्त्रों का प्रयोग करके मुझे जीत लिया है।॥4॥
 
Now you should take refuge in Bhishma. There is no other way for you because Bhishma has conquered me by using great weapons. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)