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mahabharat 5.186.35-36: काशीराजकन्या! यदि तुम भीष्म का वध करना चाहती हो और व्रत करते हुए शरीर त्याग दोगी, तो शुभ! तुम्हें घुमावदार नदी बनना पड़ेगा। तुम्हारे अंदर जल केवल वर्षा ऋतु में ही दिखाई देगा। तुम्हारे लिए किसी तीर्थस्थान पर जाना या स्नान करना अत्यंत कठिन हो जाएगा। तुम केवल वर्षा ऋतु में ही नदी मानी जाओगी। शेष आठ महीनों में तुम कहीं नहीं मिलोगी।'   |   mahabharat अध्याय 5.186: अम्बाकी कठोर तपस्या   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 186: अम्बाकी कठोर तपस्या  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  5.186.35-36 
यदि भीष्मविनाशाय काश्ये चरसि वै व्रतम्।
व्रतस्था च शरीरं त्वं यदि नाम विमोक्ष्यसि॥ ३५॥
नदी भविष्यसि शुभे कुटिला वार्षिकोदका।
दुस्तीर्था न तु विज्ञेया वार्षिकी नाष्टमासिकी॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
काशीराजकन्या! यदि तुम भीष्म का वध करना चाहती हो और व्रत करते हुए शरीर त्याग दोगी, तो शुभ! तुम्हें घुमावदार नदी बनना पड़ेगा। तुम्हारे अंदर जल केवल वर्षा ऋतु में ही दिखाई देगा। तुम्हारे लिए किसी तीर्थस्थान पर जाना या स्नान करना अत्यंत कठिन हो जाएगा। तुम केवल वर्षा ऋतु में ही नदी मानी जाओगी। शेष आठ महीनों में तुम कहीं नहीं मिलोगी।'
 
‘Kashirajkanya! If you are trying to destroy Bhishma and if you leave your body while observing a fast, then Shubh! You will have to become a winding river. Water will be visible inside you only during the rainy season. It will be very difficult to visit a pilgrimage place or take a bath inside you. You will be considered a river only during the rainy season. You will not be found in the remaining eight months.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)