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mahabharat 5.186.31-32: राजन! तब साध्वी अम्बा ने हाथ जोड़कर गंगाजी से कहा - 'चारुलोचने! भीष्म ने युद्ध में परशुरामजी को परास्त कर दिया; फिर दूसरा कौन राजा है जो युद्ध में धनुष-बाण लेकर खड़े भीष्म को परास्त कर सके? इसलिए मैं भीष्म के विनाश के लिए अत्यन्त कठोर तप कर रही हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 5.186: अम्बाकी कठोर तपस्या   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 186: अम्बाकी कठोर तपस्या  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  5.186.31-32 
सैनामथाब्रवीद् राजन् कृताञ्जलिरनिन्दिता।
भीष्मेण समरे रामो निर्जितश्चारुलोचने॥ ३१॥
कोऽन्यस्तमुत्सहेज्जेतुमुद्यतेषुं महीपति:।
साहं भीष्मविनाशाय तपस्तप्स्ये सुदारुणम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
राजन! तब साध्वी अम्बा ने हाथ जोड़कर गंगाजी से कहा - 'चारुलोचने! भीष्म ने युद्ध में परशुरामजी को परास्त कर दिया; फिर दूसरा कौन राजा है जो युद्ध में धनुष-बाण लेकर खड़े भीष्म को परास्त कर सके? इसलिए मैं भीष्म के विनाश के लिए अत्यन्त कठोर तप कर रही हूँ।'
 
King! Then Sadhvi Amba with folded hands said to Gangaji - 'Charulochne! Bhishma defeated Parshuramji in the war; then who is the other king who can defeat Bhishma standing with bow and arrow in the war? Therefore I am performing very severe penance for the destruction of Bhishma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)