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mahabharat 5.186.26-29: महाराज! शुभ नंदाश्रम, उलूकाश्रम, च्यवनाश्रम, ब्रह्मस्थान, देवताओं के पूजास्थान प्रयाग, देवारण्य, भोगवती, कौशिकाश्रम, मांडव्याश्रम, दिलीपाश्रम, रामहरद और पैलगर्गाश्रम - इन सभी तीर्थों में क्रमशः उन दिनों काशीराज की कन्याएँ कठोर व्रत के आश्रय से स्नान करती थीं। 26-29॥   |   mahabharat अध्याय 5.186: अम्बाकी कठोर तपस्या   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 186: अम्बाकी कठोर तपस्या  »  श्लोक 26-29
 
 
श्लोक  5.186.26-29 
नन्दाश्रमे महाराज तथोलूकाश्रमे शुभे।
च्यवनस्याश्रमे चैव ब्रह्मण: स्थान एव च॥ २६॥
प्रयागे देवयजने देवारण्येषु चैव ह।
भोगवत्यां महाराज कौशिकस्याश्रमे तथा॥ २७॥
माण्डव्यस्याश्रमे राजन् दिलीपस्याश्रमे तथा।
रामह्रदे च कौरव्य पैलगर्गस्य चाश्रमे॥ २८॥
एतेषु तीर्थेषु तदा काशिकन्या विशाम्पते।
आप्लावयत गात्राणि व्रतमास्थाय दुष्करम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! शुभ नंदाश्रम, उलूकाश्रम, च्यवनाश्रम, ब्रह्मस्थान, देवताओं के पूजास्थान प्रयाग, देवारण्य, भोगवती, कौशिकाश्रम, मांडव्याश्रम, दिलीपाश्रम, रामहरद और पैलगर्गाश्रम - इन सभी तीर्थों में क्रमशः उन दिनों काशीराज की कन्याएँ कठोर व्रत के आश्रय से स्नान करती थीं। 26-29॥
 
Maharaj! Auspicious Nandashram, Ulukashram, Chyavanashram, Brahmasthan, places of worship of gods Prayag, Devaranya, Bhogvati, Kaushikashram, Mandavyashram, Dilipashram, Ramharad and Pailgargashram - in all these pilgrimage places respectively, in those days the daughters of Kashiraj took bath under the shelter of a strict fast. 26-29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)