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mahabharat 5.186.24-25: तत्पश्चात् वह सिद्धों और चारणों से सेवित वत्स देश में चली गई और वहाँ पुण्यात्मा तपस्वी मुनियों के आश्रमों में विचरण करने लगी। काशीराज की वह कन्या वहाँ के पवित्र तीर्थों में दिन-रात स्नान करती और अपनी इच्छानुसार सर्वत्र विचरण करती थी।   |   mahabharat अध्याय 5.186: अम्बाकी कठोर तपस्या   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 186: अम्बाकी कठोर तपस्या  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  5.186.24-25 
ततोऽगमद् वत्सभूमिं सिद्धचारणसेविताम्।
आश्रमं पुण्यशीलानां तापसानां महात्मनाम्॥ २४॥
तत्र पुण्येषु तीर्थेषु साऽऽप्लुताङ्गी दिवानिशम्।
व्यचरत् काशिकन्या सा यथाकामविचारिणी॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह सिद्धों और चारणों से सेवित वत्स देश में चली गई और वहाँ पुण्यात्मा तपस्वी मुनियों के आश्रमों में विचरण करने लगी। काशीराज की वह कन्या वहाँ के पवित्र तीर्थों में दिन-रात स्नान करती और अपनी इच्छानुसार सर्वत्र विचरण करती थी।
 
Thereafter she went to the land of Vatsa Desh served by Siddhas and Charanas and started roaming in the ashrams of pious ascetic saints there. That daughter of the King of Kashi used to bathe in the holy holy places there day and night and used to roam everywhere according to her wish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)