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mahabharat 5.186.17-18: राजन! मैंने यह घटना देवर्षि नारद और महर्षि व्यास को भी सुनाई थी। उस समय उन दोनों ने मुझसे कहा था - 'भीष्म! तुम्हें काशीराज की पुत्री के लिए तनिक भी दुःख नहीं करना चाहिए। भगवान के विधान को कौन प्रयत्नपूर्वक टाल सकता है?'॥17-18॥   |   mahabharat अध्याय 5.186: अम्बाकी कठोर तपस्या   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 186: अम्बाकी कठोर तपस्या  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  5.186.17-18 
अपि चैतन्मया राजन् नारदेऽपि निवेदितम्।
व्यासे चैव तथा कार्यं तौ चोभौ मामवोचताम्॥ १७॥
न विषादस्त्वया कार्यो भीष्म काशिसुतां प्रति।
दैवं पुरुषकारेण को निवर्तितुमुत्सहेत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
राजन! मैंने यह घटना देवर्षि नारद और महर्षि व्यास को भी सुनाई थी। उस समय उन दोनों ने मुझसे कहा था - 'भीष्म! तुम्हें काशीराज की पुत्री के लिए तनिक भी दुःख नहीं करना चाहिए। भगवान के विधान को कौन प्रयत्नपूर्वक टाल सकता है?'॥17-18॥
 
King! I had also narrated this incident to Devarshi Narada and Maharishi Vyas. At that time both of them said to me - 'Bhishma! You should not be sad at all about the daughter of the King of Kashi. Who can avert the law of God through efforts?'॥17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)