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mahabharat 5.185.6: ‘भरतश्रेष्ठ! नारदजी जैसा कहें वैसा करो। भरतकुलतिलक! यह सम्पूर्ण जगत के लिए परम कल्याणकारी होगा।’   |   mahabharat अध्याय 5.185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.185.6 
यथाऽऽह भरतश्रेष्ठ नारदस्तत् तथा कुरु।
एतद्धि परमं श्रेयो लोकानां भरतर्षभ॥ ६॥
 
 
अनुवाद
‘भरतश्रेष्ठ! नारदजी जैसा कहें वैसा करो। भरतकुलतिलक! यह सम्पूर्ण जगत के लिए परम कल्याणकारी होगा।’
 
‘Bharatshrestha! Do as Naradji says. Bharatkulatilak! This will be extremely beneficial for the entire world. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)