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mahabharat 5.185.5: राजेन्द्र! उसके बाद मैंने आकाश में खड़े उन आठ ब्रह्मवादी वसुओं को देखा। वे मुस्कुराकर मुझसे धीरे-धीरे इस प्रकार बोले-॥5॥   |   mahabharat अध्याय 5.185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  5.185.5 
ततोऽपश्यं दिविष्ठान् वै तानष्टौ ब्रह्मवादिन:।
ते मां स्मयन्तो राजेन्द्र शनकैरिदमब्रुवन्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! उसके बाद मैंने आकाश में खड़े उन आठ ब्रह्मवादी वसुओं को देखा। वे मुस्कुराकर मुझसे धीरे-धीरे इस प्रकार बोले-॥5॥
 
Rajendra! After that I saw those eight Brahmavadi Vasus standing in the sky. They smiled and slowly spoke to me like this -॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)