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mahabharat 5.185.37: फिर उन्होंने उस लड़की को मेरे सामने बुलाया और उन सभी महान आत्माओं की उपस्थिति में उससे विनम्र शब्दों में बात की। 37   |   mahabharat अध्याय 5.185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.185.37 
मम चैव समक्षं तां कन्यामाहूय भार्गव:।
उक्तवान् दीनया वाचा मध्ये तेषां महात्मनाम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने उस लड़की को मेरे सामने बुलाया और उन सभी महान आत्माओं की उपस्थिति में उससे विनम्र शब्दों में बात की। 37
 
Then he called that girl in my presence and spoke to her in humble words in the presence of all those great souls. 37
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि अम्बोपाख्यानपर्वणि युद्धनिवृत्तौ पञ्चाशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत अम्बोपाख्यानपर्वमें युद्धनिवृत्तिविषयक एक सौ पचासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८५॥

भीष्म और परशुरामजीके बीचमें नारदजीद्वारा बीच-बचाव
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)